बाल विकास की अवस्थाएँ Stage of child development

बाल विकास की अवस्थाएँ Stage of child development

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख बाल विकास की अवस्थाएँ (Stage of child development) में।

दोस्तों यहाँ पर आप बाल विकास की अवस्थाएँ विभिन्न मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जान पाएंगे और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को भी आपको पता लगेगा, तो आइये शुरू करते है, यह लेख बाल विकास की अवस्थाएँ:-

बाल विकास की अवस्थाएँ

बाल विकास की अवस्थाएँ Stage of child development

बाल विकास की प्रक्रिया को कई अवस्था में बांटा गया है और विद्वानों के अनुसार उनका निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है:- 

रॉस के अनुसार बाल विकास की निम्न चार प्रकार की अवस्थाएं होती हैं:- 

  1. शैशवावस्था (Infancy):-  इस अवस्था का समय जन्म से 5 या 6 वर्ष तक माना गया है।
  2. बाल्यावस्था (Childhood) :- यह अवस्था 5 या 6 वर्ष से 12 वर्ष तक की होती है।
  3. किशोरावस्था (Adolescence) :- इस अवस्था का समय 12 वर्ष से 18 वर्ष तक का माना जाता है।
  4. प्रोढावस्था (Adulthood) : इस अवस्था का समय 18 वर्ष के बाद का पूरा होता है।

हरलॉक द्वारा वर्णित बाल विकास अवस्थाएँ निम्न प्रकार की हैं:- 

  1. गर्भकालीन अवस्था (Pregnancy) :- गर्भधारण से जन्म तक मानी जाती है।
  2. शैशवावस्था (Infancy) :- इस अवस्था का समय जन्म से 14 दिनों की होती है।
  3. बचपन अवस्था (Baby Hood) :- इस अवस्था का समय दो सप्ताह के बाद से 2 वर्ष तक का माना जाता है।
  4. पूर्व बाल्यावस्था (Early childhood) :- यह अवस्था 3 वर्ष से 6 वर्ष तक की होती है।
  5. उत्तर बाल्यावस्था (Lete childhood) :- इस अवस्था का समय 6 से 14 वर्ष तक का होता है।
  6. पूर्व किशोरावस्था (Puberty) :- 11 वर्ष से लेकर 17 वर्ष तक का समय इस अवस्था का होता है।
  7. किशोरावस्था (Adolescence) :- यह अवस्था 17 से 21 वर्ष तक की होती है।
  8. प्रौढ़ अवस्था (Adulthood) :- इस अवस्था का समय 21 से 40 वर्ष तक का होता है।

कॉल महोदय के अनुसार बाल विकास की निम्न अवस्थाएँ होती हैं:- 

  1. शैशवावस्था (Pregnancy) :- इस अवस्था का समय जन्म से दो वर्ष का होता है।
  2. प्रारंभिक बाल्यावस्था (Early childhood):-  यह अवस्था 2 वर्ष से 5 वर्ष तक की होती है।
  3. मध्य बाल्यावस्था (Middle childhood) :- इस अवस्था का समय 6 से 12 वर्ष तक का होता है।
  4. पूर्व किशोरावस्था (Puberty) :- 13 वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक का समय लड़को मे तथा लड़कियों मे 11 से 12 वर्ष तक का समय इस अवस्था का होता है।
  5. प्रारंभिक किशोरावस्था (Early adolescence) :- यह अवस्था बालको मे 15 से 16 वर्ष तथा बालिकाओं मे 12 से 14 वर्ष तक की होती है।
  6. मध्य किशोरावस्था (Middle adolescence) :- इस अवस्था में बालक 17 से 18 वर्ष तक तथा बालिकाएँ 15 से 17 वर्ष तक की होती हैं।
  7. उत्तर किशोरावस्था (Late adolescence) :- इस अवस्था में बालकों के लिए 19 से 20 वर्ष का समय तथा बालिकाओं के लिए 18 से 20 वर्ष तक का समय माना जाता है।
  8. प्रारंभिक प्रौढ़ अवस्था (Early Adulthood) :- इस अवस्था का समय 21 से 37 वर्ष तक का होता है
  9. मध्य प्रौढ़ अवस्था (Middle Adulthood) :- इस अवस्था का समय 35 से 49 वर्ष तक का होता है
  10. उत्तर प्रौढ़ अवस्था (Late Adulthood) :- इस अवस्था का समय 50 से 64 वर्ष तक का माना जाता है
  11. प्रारंभिक वृद्धावस्था (Early old age) :- इस अवस्था का समय 65 से 74 वर्ष तक का होता है
  12. वृद्धावस्था (Old age) :- इस अवस्था का समय 75 से आगे वाले वर्षों के लिए होता है

प्रमुख बाल विकास की अवस्थाओं का वर्णन

गर्भकालीन अवस्था :- गर्भकालीन अवस्था गर्भधारण से जन्म तक की मानी जाती है, इसको तीन उप अवस्थाओं में बांटा गया है:- 

  1. बीज अवस्था :- यह अवस्था गर्भधारण से दो सप्ताह तक की होती है।
  2. भ्रूण अवस्था :- इस अवस्था का समय 2 से 18 सप्ताह के बीच का होता है, जिसमें जीव को भ्रूण कहते हैं और इस अवस्था में मुख्य अंगों का निर्माण होता है।
  3. गर्भावस्था:- इस अवस्था का समय 8 सप्ताह से जन्म से पूर्व तक का माना जाता है।

शैशवावस्था:- जन्म से लेकर 14 दिनों की अवस्था को शैशवावस्था कहा जाता है, इसमें शिशु को नवजात भी कहते हैं। इस अवस्था में बालक को विभिन्न प्रकार की क्रियाएं जैसे कि चूसना निगलना श्वसन करना उत्सर्जन करना आदि करना पड़ता है जो मूल संवेगात्मक होती हैं।

बचपन अवस्था:- इस अवस्था का समय दो सप्ताह से लेकर 2 वर्ष तक का माना जाता है। इस अवस्था में बालक पूरी तरह से असहाय होता है और वह अपनी आवश्यकताओं के लिए अन्य लोगों पर निर्भर करता है परंतु इस अवस्था में विकास की गति तीव्र होती है।

बाल्यावस्था:- इस अवस्था का समय 3 वर्ष से प्रारंभ हो जाता है और 13 वर्ष तक रहता है, जिसके अंतर्गत पूर्व बाल्य अवस्था और उत्तर बाल्य अवस्था आती हैं। इस अवस्था में बालक में नवीन प्रवृत्तियांँ, जिज्ञासा, सृजनशीलता, अनुकरण जैसे गुण विकसित होने लगते हैं। इस अवस्था में बालक पहले अकेले रूप में सामाजिक वातावरण प्रवेश करने लगता है तथा समाज के साथ सामंजस्य स्थापित करने लगता है। इस अवस्था में बालक खिलौने की प्रति आकर्षित होता है इसलिए इस अवस्था को खिलौने की अवस्था तथा समूह में रहने के कारण गैंग आगे भी कहा जाता है।

पूर्व किशोरावस्था:- पूर्व किशोरावस्था का कुछ भाग उत्तर बाल्यावस्था में रहता है तथा कुछ भाग किशोरावस्था में चला जाता है। साधारण तौर पर इस अवस्था का कार्यकाल 4 वर्ष ही होता है। यह वह अवस्था है, जिस अवस्था में यौन अंगों का विकास तीव्रतम होता है और शारीरिक तथा मानसिक विकास होने के कारण बालक तथा बालिकाओं में विभिन्न प्रकार की परिवर्तन होने लगते हैं।

किशोरावस्था :- बाल जीवन की यह अवस्था बड़ी ही महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जो 14 वर्ष से प्रारंभ होकर लगभग 21 वर्ष तक पहुंचती है। लगभग 17 वर्ष की अवस्था पूर्ण होने पर पूर्व किशोरावस्था मानी जाती है इसके बाद की अवस्था उत्तर किशोरावस्था कहलाती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इस अवस्था को गोल्डन एज (Golden Age) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस अवस्था में विपरीत सेक्स के लोगों के प्रति आकर्षण देखने को मिलता है साथ ही साथ सामाजिकता का विकास इस अवस्था की प्रमुख विशेषताएं होती लगते हैं।

प्रौढ़ अवस्था :- 21 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक का समय प्रौढ़ अवस्था के अंतर्गत आता है, जिसमें व्यक्ति को अपने कर्तव्यों और उत्तरदायित्व को निभाना होता है। यह जीवन की एक बहुत ही विषम परिस्थिति होती है, जिसमें हमें विभिन्न प्रकार की सहनशीलता अर्जित करने के साथ-साथ अपने जीवन को उद्देश्य में लगाना होता है तथा अपने कर्तव्यों को निभाना होता है।

उत्तर मध्य अवस्था:-  यह अवस्था 41 से 64 वर्ष तक की मानी जाती है, इस अवस्था में व्यक्ति के अंदर शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं और व्यक्ति सुख मय और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए लालायत होने लगता है।

वृद्धावस्था :- यह अवस्था 65 वर्ष के आगे की अवस्था कहलाती है। यह जीवन की सबसे अंतिम अवस्था मानी जाती है और इस अवस्था में व्यक्ति की याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है। इस अवस्था में शारीरिक और मानसिक क्रिया भी कम होने को देखने को मिलती है। इस अवस्था में व्यक्ति अपने आप को आराम प्रदान करना तथा सुखमय तथा दूसरों के सहारे जीवन जीने के लिए इच्छित रहता है।

दोस्तों यहाँ पर आपने बाल विकास की अवस्थाएँ (Stage of child development) पढ़ी। जो अक्सर शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में पूँछी जाती है, तो दोस्तों इसको शेयर जरूर करें।

 

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