प्रयोगशाला विधि के गुण दोष Merits and demerits of laboratory method

प्रयोगशाला विधि के गुण दोष Merits and demerits of laboratory method

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत- बहुत स्वागत है, इस लेख प्रयोगशाला विधि के गुण दोष (merits and demerits of laboratory method) में। प्रयोगात्मक विधि के गुण एवं दोष दोस्तों इस लेख के 

माध्यम से आप प्रयोगशाला विधि क्या है? प्रयोगशाला विधि के जनक परिभाषा गुण तथा दोष के बारे में जान पायेंगे। तो आइये दोस्तों करते है शुरू यह लेख प्रयोगशाला विधि के गुण दोष:-

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प्रयोगशाला विधि के गुण दोष


प्रयोगशाला विधि क्या है what is laboratory method

प्रयोगशाला विधि के नाम से ही स्पष्ट हो रहा है, कि वह विधि जिसमें किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए प्रयोग किया जाता है, उसे प्रयोगशाला विधि (Laboratory Method) कहा जाता है।

प्रयोगशाला विधि को करो और सीखो विधि (Do and learn Method) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस विधि में छात्र स्वयं अपने हाथों से प्रयोग करता है और निष्कर्ष तक पहुंचता है।

प्रयोगशाला विधि जीव विज्ञान शिक्षण की सबसे महत्वपूर्ण और सफल पद्धति है, इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में एक प्रयोगशाला की स्थापना होती है,

जहाँ पर छात्र और छात्राएँ शिक्षक के निर्देशों के अनुसार प्रयोग करते हैं। प्रयोगशाला विधि के अंतर्गत निरीक्षण, रिपोर्ट लिखना, चित्र खींचना, प्रयोगों का विवरण देना आदि सभी कार्य भी सम्मिलित किए जाते हैं।

प्रयोगशाला में किए जाने वाले सभी प्रयोग (Experiment) तथा उनका विवरण एक विशेष प्रकार की पुस्तिका जिसे प्रयोगात्मक पुस्तिका के नाम से जाना जाता है, में लिखा जाता है, जिसका शिक्षक समय-समय पर मूल्यांकन करते हैं।

प्रयोगशाला विधि के गुण दोष


प्रयोगशाला विधि की परिभाषा Defination of laboratory method

एनसीईआरटी के अनुसार प्रयोगशाला विधि एक क्रियात्मक विधि है, जिसमें प्रत्यक्ष अनुभवों के द्वारा ज्ञान का अर्जन किया जाता है।

प्रयोगशाला विधि वह विधि है, जिसमें छात्र प्रयोग के आधार पर अमूर्त ज्ञान तथा मूर्त ज्ञान के बीच में सामंजस्य स्थापित करके ज्ञान प्राप्त करता है।

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प्रयोगशाला विधि के जनक कौन हैं Who is the father of laboratory method

योगशाला विधि अमूर्त से मूर्त की ओर शिक्षण सिद्धांत पर कार्य करती है, क्योंकि इसमें प्रयोगों के आधार पर अमूर्त ज्ञान को मूर्त ज्ञान से जोड़ा जाता है।

इस प्रयोगशाला विधि के जनक डेवी जॉन मोरविल (Davy John Morville) है, जो अमेरिका के महान दार्शनिक तथा शिक्षक थे। इन्होंने गतिशील शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रयोगशाला स्कूल की स्थापना भी की थी।

प्रयोगशाला विधि के गुण Properties of Laboratory Method

  1. प्रयोगशाला विधि वैज्ञानिक (Scientific) और मनोवैज्ञानिक (Psychologist) दोनों शिक्षण विधि है।
  2. प्रयोगशाला विधि एक ऐसी विधि है, जिसमें छात्रों को प्रेरणा और आनंद की अनुभूति होती है और छात्र अधिक सीखने के लिए जिज्ञासा प्रकट करते हैं।
  3. इस विधि के द्वारा छात्रों में नए ज्ञान का विकास होता है तथा छात्रों में विज्ञान विषय के प्रति अभिरुचि तथा निष्कर्ष प्राप्त करने का प्रशिक्षण प्राप्त होता है।
  4. प्रयोग के आधार पर छात्रों में विषय वस्तु को समझने की शक्ति का विकास होता है।
  5. प्रयोगशाला विधि के द्वारा छात्रों में आत्मविश्वास और एक दूसरे के प्रति सहयोग की भावना विकसित होती है।
  6. छात्र विज्ञान विषय के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific approach) रखेंगे तथा विज्ञान विषय का उपयोग दैनिक जीवन में समझ सकेंगे।
  7. प्रयोगशाला में विभिन्न निरीक्षण, चीर फाड़ करना, सेक्शन करना, हाथ से उपकरण तैयार करना आदि कौशल छात्रों में विकसित हो पाएंगे।
  8. प्रयोगशाला विधि के द्वारा छात्रों में कार्य करने की क्षमता रुचि और प्रगति का विकास हो जाता है।
  9. इस विधि में छात्र सक्रिय भूमिका निभाते हैं और स्थाई ज्ञान प्राप्त करते हैं।
  10. प्रयोगशाला विधि उच्च कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के लिए अधिक उपयुक्त होती है। 

प्रयोगशाला विधि के दोष Defects of the laboratory method

  1. प्रयोगशाला विधि के द्वारा संपूर्ण पाठ्यक्रम syllabus) की प्राप्ति नहीं की जा सकती।
  2. प्रयोगशाला विधि में जीव विज्ञान के सैद्धांतिक पक्षों पर बहुत ही कम महत्व दिया जाता है, इसमें केवल प्प्रायोगिक पक्ष पर महत्व देते हैं।
  3. प्रयोगशाला विधि बहुत महंगी विधि होती है, जिसमें अधिक लागत की आवश्यकता होती है।
  4. प्रयोगशाला विधि जोखिम पूर्ण होती है, इसमें विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ होते हैं तथा इनके दुरुपयोग तथा अधूरी जानकारी से घटना भी हो सकती है।
  5. प्रयोगशाला विधि में उपयोग में लाए जाने वाले जीव जंतु आदि पर प्रयोग करना होता है, अतः उनकी संख्या पर प्रभाव भी पड़ता है।
  6. प्रयोगशाला विधि में सावधानी की आवश्यकता तथा अधिक ज्ञान की आवश्यकता होती है। 
  7. प्रयोगशाला विधि निम्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के लिए अनुपयुक्त विधि होती है। 

प्रयोगशाला विधि के लिए प्रमुख बातें Key Points for the Laboratory Method

  1. प्रयोगशाला विधि के अंतर्गत किए जाने वाले प्रयोगों को घर पर कभी नहीं करना चाहिए।
  2. प्रयोगशाला में छात्र और छात्राओं को निश्चित समय पर आकर निश्चित स्थान पर दूरी बनाकर रहना चाहिए।
  3. अगर प्रयोगशाला में जीव जंतु की चीर फाड़ करना हो उसकी पहचान करना हो उसकी तैयारी पूर्व में कर लेनी चाहिए।
  4. जीव जंतुओ की चीर फाड़ करने से पहले अपने हाथों को अच्छे से धोना चाहिए तथा हाथों पर दस्ताने गिलिप्स (Gillips) पहनना चाहिए।
  5. प्रयोगशाला में बातचीत कम करनी चाहिए तथा सावधानीपूर्वक प्रयोग करना चाहिए।
  6. प्रयोगशाला में रखे हुए विभिन्न रासायनिक पदार्थों (Chemicals) के बारे में जानकारी होनी चाहिए और उनका बड़ी सावधानी से उपयोग करना चाहिए।
  7. प्रयोगशाला में जो भी प्रयोग किए गए हैं, जो भी चीर फाड़ किए गए हैं, उस स्थान को साफ करना चाहिए तथा प्रयोग किए गए जंतु आदि को उचित स्थान पर रख देना चाहिए। 

दोस्तों आपने इस लेख में प्रयोगशाला विधि क्या है?प्रयोगात्मक विधि के गुण एवं दोष प्रयोगशाला विधि के गुण दोष (merits and demerits of laboratory method)

तथा प्रयोगशाला विधि के अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों (Importent fact) के बारे में जाना। आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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